हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हिज़्बुल्लाह लेबनान ने अपने शोक संदेश में आयतुल्लाहिल उज़्मा फ़य्याज़ की शैक्षिक, वैचारिक और आध्यात्मिक सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने कई दशकों तक अध्यापन, प्रशिक्षण और बौद्धिक मार्गदर्शन के माध्यम से उलेमा, फ़ुज़ला और धार्मिक छात्रों की अनेक पीढ़ियाँ तैयार कीं। इन शिष्यों ने उनके ज्ञान, नैतिकता और विचारों के संदेश को इस्लामी जगत के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचाया।
बयान में कहा गया कि आयतुल्लाहिल उज़्मा फ़य्याज़, महान मरजा-ए-दीन सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई के प्रमुख शिष्यों में से थे। उन्होंने अपनी मूल्यवान फ़िक़्ही, उसूली और शैक्षिक शोध तथा रचनाओं के माध्यम से इस्लामी ज्ञान-भंडार को समृद्ध किया। साथ ही उन्होंने बुद्धिमत्ता, संतुलन और सहिष्णुता पर आधारित इस्लामी मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हिज़्बुल्लाह ने आगे कहा कि स्वर्गीय मरजा-ए-तक़लीद अपने सिद्धांतनिष्ठ और अडिग रुख़ के लिए भी प्रसिद्ध थे। वे हमेशा उम्मत के न्यायपूर्ण मुद्दों, उत्पीड़ितों के अधिकारों तथा सत्य और न्याय के समर्थन में खड़े रहे।
बयान के अंत में हिज़्बुल्लाह लेबनान ने मरजा-ए-आलीक़द्र सय्यद अली हुसैनी सिस्तानी, अन्य मराजे-ए-ऐज़ाम, हौज़ा-ए-इल्मिया, उलेमा-ए-उम्मत, स्वर्गीय विद्वान के परिवारजनों, शिष्यों, श्रद्धालुओं और अनुयायियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। साथ ही दुआ की कि अल्लाह तआला उन्हें अपनी असीम रहमत और कृपा में स्थान प्रदान करे तथा उनके परिजनों और चाहने वालों को धैर्य और सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
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